गौरव कुशवाहा/कानपुर देहात: लोक निर्माण विभाग कानपुर देहात मे इस वक्त भारी वित्तीय अनियमितताओ का खेल जारी है। भारी मामला ये है कि टेंडर की विज्ञप्ति जारी करने के साथ ही लाखो का भुगतान कैसे करवा दिया जा रहा है.? क्या इसपर किसी अधिकारी की नजर नही है या फिर सभी के आपसी गठजोड़ से इस भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है।
पब्लिक डोमेन मे उपलब्ध डाटा ये बताता है कि नवम्बर माह में लोक निर्माण विभाग द्वारा जिला मार्गो के उच्चीकरण के नए कार्यों हेतु एकमुश्त व्यवस्था के नामपर स्वीकृत बुधौली रसधान डेरापुर मार्ग के चौड़ीकरण कार्य में आवंटित धन 5 करोड़ 83 लाख 7 हजार रुपए के टेंडर की विज्ञप्ति के बाद ही उसे 56 लाख 9 हजार 638 रुपए का भुगतान कर दिया गया। जो कि साफतौर पर बड़ी वित्तीय अनियमितता को दर्शाता है, बड़ा सवाल उठता है कि आखिर टेंडर खुलने से पहले ही इतनी बड़ी राशि का इस्तेमाल कहा और किस मद में किया गया है.?

जबकि शासन से स्पष्ट नियम है कि कोई भी स्वीकृत राशि एकमुश्त आहरित नहीं की जाएगी बल्कि कार्यों के अनुसार धन को खर्च करने का नियम है इसमें एक और बात स्पष्ट है कि यूटिलिटी शिफ्टिंग के नामपर भी टेंडर खुलने से पहले कोई धनराशि देने का वर्तमान नियम नही है।
वित्तीय अनियमितता के इस मामले के साथ साथ देहात में ठेकेदारों द्वारा लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को दिए गए एक पत्र ने भी खासी सनसनी मचा रखी है आरोप है कि खंड में कार्यरत कैशियर और एकाउंटेंट हर बिल के भुगतान के लिए 10 प्रतिशत कमीशन लेने के बाद ही कोई भुगतान करते है।
इस मामले पर डिविजन अधिशाषी अभियंता ने बताया कि मामले की जानकारी हुई है आगे की कार्यवाही और निपटान के लिए शिकायत को आगे फॉरवर्ड कर दिया गया है तो वहीं जब इस बाबत मुख्य अभियंता से बात की गई तब उन्होंने ऐसे किसी मामले की जानकारी होने से इंकार कर दिया।
साफ है विभाग,विभाग को बचाने के लिए हर तरह के प्रयास करने मे लग गया है। अब देखना ये है कि इस मामले पर जिले के जिलाधिकारी कब संज्ञान लेते है फिलहाल ये साफ हो गया है कि मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस वाली नीति पर प्रदेश में मोटी कमाई करने वाली जगहों पर बैठकर पलीता लगाने में कोई कसर नही छोड़ रहे।
























