प्लाट पर कब्जे का विवाद,सीपी से लेकर सीएम तक फरियाद

गौरव कुशवाहा,कानपुर: यूपी मे गुंडों माफियाओं समेत आपराधिक छवि वाले वकीलों पत्रकारों पर कानूनी कार्यवाही करने वाली कानपुर पुलिस के कुछ थाना प्रभारियों का दम अब रसूखदार गुंडों और माफियाओं के सामने फिर से फूलता नजर आ रहा है।

कानपुर के सेन थाना अंतर्गत कल्याणीपुरवा मे जीवनभर की गाढ़ी कमाई लगाकर जमीन खरीदने और अब उसपर मकान बनाकर रहने की कोशिश करने वाले परिवार इस बात का जीता जागता सबूत है, पीडीता प्रियंका सिंह कहती है उन्होंने जिससे जमीन खरीदी उस जमीनपर उसका पुश्तैनी कब्जा है पूरा गांव इसका गवाह है लेखपाल की रिपोर्ट भी यही कहती है इसके साथ ही दो अन्य पीड़ित रामनरेश यादव और बुजुर्ग कमलेश देवी भी यही आरोप लगाते हुए कहती है कि गुंडे पैसा मांगते है हम पैसा नही देंगे चाहे जो हो जाए।

लेखपाल, सेन द्वारा लगाई गई रिपोर्ट
लेखपाल, सेन द्वारा लगाई गई रिपोर्ट

पुलिस को दिए गए शिकायती पत्र में गांव के ही अभय सिंह, लवकुश, रोहित उर्फ भट्टी, राजप्रताप,राजेश सिंह आदि का जिक्र है इनपर आरोप है कि ये जबरन प्लॉट की बाउंड्री तोड़ते है और जानमाल की धमकी देते है,पीड़ित महिलाओं ने जीवनभर की कमाई लगाकर जो प्लाट खरीदे अब गुंडे उन्हें बनने नहीं दे रहे, पैसा मांगते है नहीं देने पर बाउंड्री तोड़ देते है।

पीड़िता,कमलेश
पीड़िता,कमलेश

मामले पर पीड़ित पक्ष के पास जमीन की रजिस्ट्री और सालों पुराना कब्जा मौजूद है उसके बावजूद गांव के आपराधिक प्रकृति के लोग जब मौके पर बगैर किसी वैध कागज काम रुकवाने पहुंचे तब पुलिस को शिकायत की गई लेकिन उसके बाद भी पुलिस ने कोई कार्यवाह नहीं की उल्टा पुलिस ने मौके पर जाकर बार बार नियम विरुद्ध काम करते हुए काम को रुकवा दिया, महीनों से थाना प्रभारी पीड़ित को कानून की चौखट पर दौड़ाते रहे एक भी बार थाना प्रभारी ने मौके का निरक्षण नहीं किया।

तंग होकर फांसी लगा चुके है पीड़ित

पुलिस कमिश्नर ने दिया था कार्यवाही का भरोसा।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि जब वो कानपुर पुलिस कमिश्नर के यहां गए थे तब खुद पुलिस कमिश्नर ने इन अपराधियों पर मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही करने की बात कही थी लेकिन उसके बाद भी सेन के लापरवाह थाना प्रभारी ने मामले पर कोई ठोस कार्यवाही नही की जिसे अपराधियों का मनोबल बढ़ता चला गया।

मामला मीडिया में आने के बाद जागी पुलिस,अब हुआ मामला दर्ज

फिलहाल मामला मीडिया में आने के बाद पुलिस ने अपने हिसाब से हल्की तहरीर लिखवाकर आरोपियों पर मुकदमा पंजीकृत कर लिया है और कार्यवाही की बात कही है लेकिन फिर से एक यक्ष प्रश्न खड़ा होता है कि अगर कोई पीड़ित मीडिया तक नहीं पहुंच पाएगा तब क्या उसके मामले में पुलिस सीपी से लेकर सीएम तक जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नही करेगी.?

क्या महीनों तक गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाते हुए किसी भी पीड़ित के मामले में कार्यवाही करने के लिए हमारी पुलिस महीनों मामला मीडिया में आने का इंतजार करते हुए गुंडों अपराधियों को क्षति करने का मौका देती रहेगी.? इसके जिम्मेदार अफसरों पर नकेल कब कसी जाएगी.?