Fatehpur News:नहर में पानी नहीं, झाड़ियां ही झाड़ियां सरकार से मदद की आस मे किसान

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अपनी मांगो को लेकर प्रदर्शन करते किसान

विकास साहू,फतेहपुर। अमौली क्षेत्र के दपसौरा गांव से निकलने वाली मुख्य नहर इन दिनों बदहाली की चरम सीमा पर है। नहर में पानी चालू होने के बावजूद सिकंदरपुर माइनर रुस्तमपुर होते हुए दर्जनों गांवों तक नहीं पहुंच पा रहा है। कभी किसानों के खेतों को जीवनदायी जल देने वाली यह माइनर अब उपेक्षा और अव्यवस्था का प्रतीक बन चुकी है।

खेत प्यासे, किसान मजबूर.!

गेहूं की बुवाई पूरी हो चुकी है और रबी फसल की सिंचाई का यह सबसे महत्वपूर्ण समय है। लेकिन नहर में एक बूंद पानी न होने से किसानों में हताशा फैल गई है। लगभग एक हजार बीघा खेती इस माइनर पर निर्भर थी, लेकिन कई वर्षों से सफाई न होने के कारण पानी गांवों तक नहीं पहुंच रहा।मजबूरी में किसान डीजल पंप और ट्यूबवेल चलाने पर विवश हैं। इससे सिंचाई लागत कई गुना बढ़ रही है। बढ़ती महंगाई के बीच नहरों की उपेक्षा किसानों की आर्थिक कमर तोड़ रही है।

नहर में झाड़ियां—राहगीरों के लिए खतरा.!

सूखी नहर अब झाड़ियों, झांक और जंगली पेड़ों से पटी पड़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि इन झाड़ियों में जहरीले जीव-जंतु के छिपे होने की आशंका रहती है।बरसात में फिसलन और दुर्गंध की समस्या और विकराल हो जाती है।स्कूल के बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इस मार्ग से गुजरने में डरते हैं।कई स्थानों पर नहर की सीमा सड़क से साफ नजर नहीं आती, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

दर्जनों गांव प्रभावित.!

यह नहर दपसौरा से गज्झा डेरा, रुस्तमपुर, बौरा डेरा, मन्ना डेरा, अयोध्या डेरा, तारन डेरा, बगहा डेरा, मवई, सिकंदरपुर जैसे दर्जनों गांवों के बीच से गुजरती है। किसान वर्षों से नहर की मरम्मत और सफाई की मांग कर रहे हैं।

किसानों का आरोप ,सिर्फ कागजों में योजनाएं.!

स्थानीय किसान जगदीश सिंह, जितेंद्र सिंह, थानेदार सिंह, संजय सिंह, अनिल कुमार, श्याम बहादुर, किशन सिंह, राम बहादुर व बद्री सिंह का कहना है “पांच साल से नहर की सफाई नहीं हुई। कागजों में सब योजनाएं चल रही हैं, जमीन पर कुछ नहीं। नहर की हालत दिन–प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।”दपसौरा पंप कैनाल के जेई अजय ने बताया “पिछले वर्ष सफाई कराई गई थी। इस वर्ष अब तक नहीं हुई है। शीघ्र ही सफाई कराई जाएगी।”