इन्टरनेट की दुनिया में भी आया युद्ध का खतरा ?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की खबरों में अक्सर तेल आपूर्ति और जहाजों की आवाजाही की चर्चा होती है। लेकिन एक कम चर्चित सच्चाई यह भी है कि दुनिया की डिजिटल व्यवस्था का एक अहम हिस्सा भी इसी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लंबे समय से वैश्विक तेल आपूर्ति की “लाइफलाइन” कहा जाता रहा है, लेकिन अब विशेषज्ञ इसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से भी एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट मानने लगे हैं।

दरअसल, दुनिया का अधिकांश इंटरनेट डेटा समुद्र के नीचे बिछे फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के जरिए चलता है। ये केबल महाद्वीपों को जोड़ते हैं और इन्हीं के माध्यम से ई-मेल, बैंकिंग ट्रांजैक्शन, क्लाउड डेटा, वीडियो कॉल और सरकारी संचार तक संचालित होते हैं। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक का लगभग 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इन अंडरसी केबल नेटवर्क पर निर्भर करता है।

समुद्र के नीचे बिछा है इंटरनेट का विशाल नेटवर्क

आज दुनिया में 400 से अधिक बड़े सबमरीन केबल सिस्टम सक्रिय हैं, जिनकी कुल लंबाई लाखों किलोमीटर में फैली हुई है। ये केबल समुद्र की सतह से कई हजार मीटर नीचे बिछे होते हैं और प्रकाश की गति के करीब डेटा ट्रांसफर करने में सक्षम होते हैं।

एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच डेटा ट्रैफिक के कई महत्वपूर्ण रूट मिडिल ईस्ट के आसपास से गुजरते हैं। Gulf Bridge International, FALCON, Europe India Gateway और I-ME-WE जैसे प्रमुख केबल नेटवर्क इसी क्षेत्र से होकर गुजरते हैं और एशिया को यूरोप से जोड़ते हैं।

इसी समुद्री क्षेत्र के ऊपर से दुनिया का एक बड़ा तेल मार्ग—Strait of Hormuz—गुजरता है। यही वजह है कि इसे अब ऊर्जा और डिजिटल दोनों दृष्टियों से रणनीतिक महत्व का क्षेत्र माना जाता है।

भारत के इंटरनेट पर कितना असर पड़ सकता है

तकनीकी रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत से यूरोप और अमेरिका की ओर जाने वाले कई डेटा रूट मिडिल ईस्ट के समुद्री मार्गों से होकर गुजरते हैं। अनुमान है कि भारत के पश्चिम दिशा में जाने वाले इंटरनेट ट्रैफिक का लगभग एक-तिहाई हिस्सा इस क्षेत्र से गुजरता है

हालांकि भारतीय टेलीकॉम कंपनियां अलग-अलग केबल नेटवर्क और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करती हैं। उदाहरण के तौर पर कुछ कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि उनके प्रमुख डेटा रूट लाल सागर और अदन की खाड़ी के रास्ते भी जाते हैं। इसी वजह से किसी एक क्षेत्र में समस्या आने पर भी आमतौर पर पूरा इंटरनेट बंद नहीं होता, बल्कि ट्रैफिक को दूसरे मार्गों से मोड़ दिया जाता है।

पहले भी केबल कटने से प्रभावित हुआ है इंटरनेट

हाल के वर्षों में अंडरसी केबल को नुकसान पहुंचने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कुछ समय पहले लाल सागर क्षेत्र में कई केबल कट जाने से एशिया और मिडिल ईस्ट के कई देशों में इंटरनेट कनेक्शन प्रभावित हुआ था।

उस दौरान कई टेक कंपनियों को अपना डेटा ट्रैफिक दूसरे नेटवर्क पर रीरूट करना पड़ा, जिससे इंटरनेट स्पीड कम हुई और क्लाउड सेवाओं में देरी देखी गई।

डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर क्यों है इतना संवेदनशील

समुद्र के नीचे बिछे केबल बेहद मजबूत होते हैं, लेकिन पूरी तरह सुरक्षित नहीं। कई बार जहाजों के एंकर, मछली पकड़ने वाली गतिविधियां, प्राकृतिक आपदाएं या भू-राजनीतिक तनाव भी इन केबल्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

अगर किसी रणनीतिक समुद्री मार्ग में कई केबल एक साथ प्रभावित हो जाएं, तो अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्तों से भेजना पड़ता है। इससे नेटवर्क लेटेंसी बढ़ सकती है और कई ऑनलाइन सेवाएं धीमी हो सकती हैं।

मिडिल ईस्ट बन रहा है डिजिटल हब

पिछले कुछ वर्षों में मिडिल ईस्ट में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश हुआ है। अमेज़न, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां यहां बड़े डेटा सेंटर और क्लाउड सुविधाएं विकसित कर रही हैं।

इन डेटा सेंटर्स को दुनिया के बाकी हिस्सों से जोड़ने के लिए कई अंडरसी केबल इसी क्षेत्र से गुजरते हैं। इसलिए अगर इस क्षेत्र में सैन्य तनाव या समुद्री गतिविधियों में बाधा आती है, तो उसका असर केवल ऊर्जा बाजार ही नहीं बल्कि डिजिटल सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

अब होर्मुज सिर्फ तेल का रास्ता नहीं

जब भी होर्मुज जलडमरूमध्य की चर्चा होती है तो आमतौर पर तेल टैंकरों और शिपिंग मार्गों का जिक्र होता है। लेकिन तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के नीचे बिछे फाइबर-ऑप्टिक केबल अब वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ बन चुके हैं।

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यही कारण है कि आज Strait of Hormuz को सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति का नहीं बल्कि इंटरनेट और वैश्विक डेटा ट्रैफिक का भी एक महत्वपूर्ण रणनीतिक चोकपॉइंट माना जा रहा है।

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अगर इस क्षेत्र में स्थिरता बनी रहती है तो वैश्विक डिजिटल नेटवर्क सामान्य रूप से चलता रहेगा, लेकिन तनाव बढ़ने की स्थिति में दुनिया की डिजिटल कनेक्टिविटी भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकती है।