कैलाश पर्वत के रहस्य के सामने विज्ञान ने भी क्यो मान ली हार.?

स्टेट मीडिया टीम: कहा जाता है विश्व मे हर विषय वस्तु के पीछे होने वाली क्रिया के पीछे विज्ञान का कोई ना कोई नियम जरूर होता है लेकिन क्या हो जब किसी मामले मे विज्ञान भी अपने घुटने टेककर हार मान ले। अगर आपको यकीन नही हो रहा ऐसी स्थिति मे आपको भारत के उत्तर से पूर्व की पर्वत श्रेणी मे शामिल कैलाश पर्वत “Kailash Mountain” के बारे मे जरूर पढ़ना चाहिए।

कैलाश पर्वत विश्व का पहला ऐसा स्थान है जहा आजतक कोई चढ़ नही सका है यहां चढ़ने की कोशिश मे कई पर्वतारोहियों की मौत तक हो गई है फिलहाल  सरकार ने यहा हर तरह की चढ़ाई पर प्रतिबंध लगा रखा है।

कहा है कैलाश और क्या है रहस्य.?

कैलाश पर्वत तिब्बत के न्गारी प्रान्त मे स्थित है और इसकी ऊंचाई 6638 मीटर है इस पर्वत के लिए मान्यता है कि यहां भगवान शिव का निवास है और कैलाश पर्वत को ही दुनिया का केंद्र भी माना जाता है। कैलाश पर्वत से ज्यादा ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ चुके पर्वतारोही भी कैलाश पर्वत से हार मान चुके है। कहा जाता है कि जैसे ही कोई पर्वतारोही कैलाश पर्वत की चढ़ाई शुरू करता है वैसे ही आगे बढ़ने पर उसके नाखून बढ़ने शुरू हो जाते है बाल सफेद होने लगते है और इसी के साथ उम्र बढ़नी शुरू हो जाती है।

 

क्या कहते है अनुभव कर चुके पर्वतारोही.?

कई समाचार डॉक्यूमेंट्री के हिसाब से कई पर्वतारोही जो जवान थे वो आधी चढ़ाई करने के बाद ही बूढ़े हो गए और जब उन्हें वापस लाया गया तब उन्होंने जो बताया वो चौंकाने वाला था उनके हिसाब से ऊपर बढ़ते ही आप रास्ता भूलने लगते है ॐ को ध्वनि सुनाई देने लगती है। शरीर से आत्मा अलग होने जैसा अहसास होता है।

वैज्ञानिकों ने इसपर की रिसर्च पर क्या कहा.? कैलाश पर्वत पर हुए कई वैज्ञानिक शोधो के बाद वैज्ञानिक इस आंकड़े पर पहुंचे है कि कैलाश “Kailash Mountain” में बेहद अधिक चुंबकीय क्षेत्र पाया जाता है और यही वो वजह है कि यहां आधुनिक तकनीक और कंपास काम करना बंद कर देते हैं और पर्वतारोही सही दिशा में नहीं चल पाते हैं। हालांकि वैज्ञानिक ये नही बता पाए कि आखिर ये चुंबकीय प्रभाव किन कारणों से है। विज्ञान ने भी स्वीकार किया है कि कैलाश पर्वत अपने आप में एक वैज्ञानिक चुनौती है और जरूर इसके पीछे कोई ना कोई अध्यात्मिक ताकत है।