अमन के लिए एकत्र हुआ “विश्व शांति संकल्प मंच”

विश्व शांति संकल्प मंच
विश्व शांति संकल्प मंच
जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध की भाषा फिर से सामान्य होती जा रही है, उसी समय कानपुर की सड़कों पर एक अलग तरह की हलचल दिखाई दे रही है। यह भीड़ किसी रैली की नहीं है, न ही किसी चुनावी सभा की। यहां लोग खड़े होकर कागज पर अपने नाम लिख रहे हैं—एक हस्ताक्षर अभियान के समर्थन में, जिसकी मांग है कि दुनिया को युद्ध नहीं, शांति के रास्ते की ओर बढ़ना चाहिए। यह अभियान किसी बड़ी राजनीतिक मशीनरी का हिस्सा नहीं लगता। इसमें कॉलेज के छात्र हैं, कुछ सामाजिक कार्यकर्ता हैं, कुछ ऐसे नागरिक भी हैं जो शायद पहली बार किसी सार्वजनिक पहल में शामिल हो रहे हैं। उनके हाथ में नारेबाजी वाले पोस्टर कम और शांति की अपील वाले छोटे-छोटे कागज ज्यादा दिखाई देते हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस अभियान की चर्चा मुख्यधारा के टीवी चैनलों पर बहुत कम दिखाई देती है। लेकिन सोशल मीडिया पर इसके छोटे-छोटे वीडियो और तस्वीरें लगातार साझा हो रही हैं। स्थानीय युवाओं ने इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर फैलाने की कोशिश की है, ताकि यह संदेश शहर की सीमाओं से बाहर भी जा सके। अभियान से जुड़े लोग कहते हैं कि उनका उद्देश्य किसी एक देश या सरकार के खिलाफ बोलना नहीं है। उनका कहना है कि युद्ध का सबसे बड़ा नुकसान हमेशा आम लोगों को होता है—वे लोग जो युद्ध के फैसले नहीं लेते, लेकिन उसकी कीमत जरूर चुकाते हैं। कई लोग हस्ताक्षर करते समय यही बात दोहराते दिखे कि आज की दुनिया में हथियारों की ताकत पहले से कहीं ज्यादा है, इसलिए युद्ध का खतरा भी पहले से ज्यादा खतरनाक हो चुका है। ऐसे में शांति की बात करना आदर्शवाद नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक जरूरत है। शहर के कुछ शिक्षकों और छात्रों ने भी इस पहल को समर्थन दिया है। उनका कहना है कि अगर समाज में शांति की बात करने वाले लोग चुप हो जाएंगे, तो सार्वजनिक चर्चा सिर्फ संघर्ष और शक्ति प्रदर्शन तक सिमट जाएगी। हस्ताक्षर अभियान का एक और दिलचस्प पहलू यह है कि इसमें भाग लेने वाले कई लोग किसी बड़े राजनीतिक विचार से प्रेरित नहीं दिखते। वे बस इतना कहते हैं कि युद्ध का विचार ही उन्हें असहज करता है। उनके लिए यह अभियान किसी विचारधारा का प्रचार नहीं, बल्कि एक नैतिक प्रतिक्रिया है—उस माहौल के खिलाफ जिसमें अक्सर युद्ध को राष्ट्र गौरव या रणनीतिक जीत की भाषा में पेश किया जाता है। शायद यही वजह है कि यह छोटा सा अभियान शहर की सामान्य दिनचर्या के बीच एक अलग तरह का सवाल खड़ा करता है— क्या दुनिया में शांति की मांग करने वाले लोग हमेशा कम दिखाई देते हैं, या वे बस उतनी आवाज़ में नहीं बोलते जितनी आवाज़ में युद्ध की घोषणाएं की जाती हैं?

कानपुर की सिसामऊ सीट पर 2027 से पहले किस दिशा में बह रही है राजनीतिक हवा?

कानपुर की इस पहल ने कम से कम इतना तो कर ही दिया है कि इस सवाल को फिर से सार्वजनिक बातचीत का हिस्सा बना दिया है। और कभी-कभी इतिहास में बदलाव बड़े भाषणों से नहीं, बल्कि किसी कागज पर किए गए छोटे-से हस्ताक्षर से भी शुरू हो जाते हैं।

क्या निशांत कुमार संभाल सकेंगे JDU?

राज कुमार अग्निहोत्री के एम भाई सर्वेश पांडेय निनन्नी,सुरजीत सिंह अमित गुप्ता , राजेश वाजपेई प्रताप साहनी दिनेश अग्निहोत्री ,अतुल कटियार ,अंकित अवस्थी , ज्ञान तिवारी , राजेश आजाद ,पदम गुप्ता पवन मिश्र गुरु प्रसाद सैनी , इलियास अकिल , अनिल शुक्ल सरोज दीक्षित अशोक दीक्षित आदि लोगों ने सहभागिता की युद्ध के विरुद्ध शांति के लिए आज सेनानी सदन कानपुर के बाहर हस्ताक्षर अभियान चला के जिला धिकारी कार्यालय कानपुर के प्रशासनिक अधिकारी श्री देशराज सोनकर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन प्रेषित किया, कानपुर युद्ध के विरुद्ध शांति के लिए चला हस्ताक्षर अभियान