कानपुर। जिस युवक की जिंदगी एक कोचिंग सेंटर में गार्ड की नौकरी से चल रही थी, उसके नाम पर जीएसटी विभाग के रिकॉर्ड में करोड़ों रुपये का कारोबार सामने आ गया। विभाग की ओर से जारी नोटिस में 17.48 करोड़ रुपये के लेनदेन पर 3.15 करोड़ रुपये टैक्स मांगा गया। नोटिस की जानकारी मिलने के बाद युवक की नौकरी भी चली गई और परिवार का राशन कार्ड तक निरस्त हो गया।
हंसपुरम आवास विकास निवासी “ओमजी शुक्ला” का कहना है कि उन्होंने कभी कपड़ों का कारोबार नहीं किया, लेकिन जीएसटी नोटिस में उनके नाम से इसी कारोबार में करोड़ों रुपये का लेनदेन दर्ज बताया गया है। ओमजी के मुताबिक अगस्त 2025 में दिल्ली से जीएसटी का नोटिस उनके घर भेजा गया था। परिवार के घर पर नहीं होने के कारण नोटिस पड़ोसी को दे दिया गया।
इसके बाद 21 अगस्त 2025 को 32 पेज का एक और नोटिस पहुंचा। इसमें करीब 17.48 करोड़ रुपये के कथित लेनदेन और 3.15 करोड़ रुपये के टैक्स का जिक्र था। नोटिस में सात दिन के भीतर संबंधित दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा गया था।
नोटिस की खबर लगी तो चली गई नौकरी
ओमजी के मुताबिक वह उस समय एक कोचिंग सेंटर में गार्ड के तौर पर काम कर रहे थे। जब कोचिंग संचालक को जीएसटी नोटिस की जानकारी हुई तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। नौकरी जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति और बिगड़ गई।
पुलिस से लेकर मुख्यमंत्री के जनता दरबार तक लगाई गुहार।
मामले को लेकर पीड़ित ने नौबस्ता थाने से लेकर पुलिस आयुक्त कार्यालय तक शिकायत की। इसके बाद मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी अपनी समस्या रखी। 15 दिसंबर 2025 को वहां गुहार लगाने के बावजूद तत्काल राहत नहीं मिली।
पीड़ित का दावा है कि 13 जनवरी 2026 को राशन लेने कोटेदार के पास पहुंचने पर उसे पता चला कि जीएसटी नोटिस की वजह से उसका राशन कार्ड भी निरस्त कर दिया गया है।
FIR दर्ज अब क्राइम ब्रांच करेगी जांच।
मंगलवार को एक बार फिर पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे ओमजी शुक्ला ने अपनी शिकायत अधिकारियों के सामने रखी। पुलिस आयुक्त रवींद्र लाल ने बताया कि नौबस्ता थाने में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं और मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई है।
पुलिस का कहना है कि जांच में पूरे मामले की पड़ताल की जाएगी और यदि किसी स्तर पर धोखाधड़ी या अन्य अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
एक तरफ करोड़ों के कारोबार का रिकॉर्ड, दूसरी तरफ गार्ड की नौकरी—अब जांच में यह साफ होगा कि ओमजी शुक्ला के नाम पर इतना बड़ा कारोबार आखिर किसने और कैसे किया।



















