गौरव कुशवाहा-कानपुर: शहर के तमाम पाश इलाको में से एक स्वरूप नगर को ना जाने कैसे नशे के सौदागरों की नजर लग गई है। यहां हर दूसरी गली मे रेस्टोरेंट के नामपर अवैध रूप से हुक्का बार संचालित किए जा रहे है।
इन रेस्टोरेंटस मे क्या नाबालिग क्या बालिग क्या युवक क्या युवती सभी को ना सिर्फ प्रतिबंधित हुक्के का सेवन करवाया जाता है बल्कि उसे भी एक क़दम आगे बढ़कर भारी दामों में ठंडी बियर और अंग्रेजी शराब तक उपलब्ध कराई जाती है। यहां कई रेस्टोरेंट तो ऐसे है जहां कपल्स को बाकायदा प्राइवेट स्पेस तक उपलब्ध कराया जाता है। कस्टमर्स का मन लगा रहे इसलिए बाकायदा डांसर्स की व्यवस्था की जाती है। अगर इसे भी आगे बढ़े तो समझिए तमाम रेस्टोरेंट सुबह के 3 से 4 बजे तक बिना किसी नियम कायदे के संचालित किए जाते है।

Lightout 2.0 हाल ही मे पेश कर चुका है नशे के कारोबार का प्रमाण।
हाल ही मे स्वरूप नगर थाना अंतर्गत अवैध रूप से संचालित किए जा रहे रेस्टोरेंट Light Out2.0 पर पुलिस ने छापेमारी कर भारी मात्रा मे प्रतिबंधित हुक्का और नशे का सामान बरामद किया था साथ ही 4 लड़कों को गिरफ्तार कर मुकदमा भी लिखा गया था लेकिन समाजवादी पार्टी से सम्बन्ध रखने वाले संचालक चौहान ब्रदर्स ने अपने रसूख के दमपर खुद को बचाकर थाने से ही मुकदमा लिखे जाने के बावजूद मामले को रफ़ा दफा करवा लिया था।
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जिसके बाद से लगातार इस अवैध रेस्टोरेंट से प्रतिबंधित हुक्के और शराब के सेवन आदि के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए लेकिन स्वरूप नगर पुलिस ने उसके बाद कोई ठोस कार्यवाही नही की। उसी का परिणाम है कि अब न्यू ईयर ईव नाइट पार्टी पर स्वरूप नगर को नशे में झोंकने की पूरी तैयारी है। तमाम रेस्टोरेंट संचालकों ने इसके लिए करोड़ो का नशीला फ्लेवर रसियन डांसर्स से लेकर कस्टमर को सुकून पहुंचाने के तमाम साधन जमा कर लिए है।
कभी भी गोवा की तरह हो सकते है हालात।
आपको जानकर हैरानी होगी कि इस तरह के ज्यादातर रेस्टोरेंट के पास आग लग जाने के समय बचाव के लिए कोई सुरक्षा तंत्र नही है। इनमें से ज्यादातर के पास फूड लाइसेंस नही है इसे भी एक कदम आगे बढ़ जाइए तो 90% रेस्टोरेंट ऐसी इमारतों मे चल रहे है जो नक्शे के बिल्कुल विपरीत है। अगर हालात थोड़े भी बिगड़ जाए तो छोटे छोटे दरवाजों से लोग बाहर तक नही निकल पाएंगे साफ है गोवा के नाइट क्लब जैसी स्थिति बनने में यहां देर नही लगेगी। ऐसे मे आप समझ सकते है कि हम इन्हें अवैध रेस्टोरेंट क्यों लिख रहे है।
प्रतिमाह इस तरीके से दरकिनार की जाती है चिंताएं।
अंदर की जानकारी है कि स्वरूप नगर क्षेत्र का छोटे से छोटा रेस्टोरेंट यानी अवैध हुक्का बार कार्यवाही से बचने के लिए 20 हजार प्रतिमाह तक दे रहे है। कई संचालक तो कुछ खाकी धारियों को बोनस मे शॉपिंग तक करवा रहे है।

कौन है इन सबका जिम्मेदार.?
प्रतिबंधित हुक्के के रूप में लिए जा रहे फेफड़ों को जलाने वाले नशे को रोकने का काम भले ही पुलिस का है लेकिन अग्निशमन, कानपुर विकास प्राधिकरण,खाद्य विभाग,आबकारी विभाग ने भी अपना काम ठीक ढंग से नही किया इसलिए हम मात्र पुलिस को इसका जिम्मेदार नही कह सकते फिर भी अगर पुलिस प्रशासन और अन्य जिम्मेदार विभाग अपना काम इस नए साल से पहले शुरू कर दे तो जाहिर है नशे के ये काले घने बादल स्वरूप नगर से हमेशा हमेशा के लिए छट सकते है।
हुक्के का धुआं सिगरेट से भी भयानक है।
हुक्के में इस्तेमाल होने वाली तंबाकू स्वादयुक्त होती है। हुक्का पीते समय, तंबाकू को चारकोल से गर्म किया जाता है। चारकोल तंबाकू को जलाता है और तंबाकू का धुआँ पानी के कटोरे में खींच लिया जाता है। व्यक्ति साँस लेने के लिए एक माउथपीस का इस्तेमाल करता है। धुआँ पानी और एक रबर ट्यूब से होकर गुजरता है जो माउथपीस में समा जाती है।
हुक्का पाइप में मौजूद तंबाकू सिगरेट से कम जहरीला नहीं होता। हुक्के में मौजूद पानी धुएँ को ठंडा करता है, लेकिन धुएँ में मौजूद विषाक्त पदार्थों को छान नहीं पाता। हुक्का पीने वाले सिगरेट पीने वालों की तुलना में ज़्यादा तंबाकू का धुआँ साँस के ज़रिए अंदर ले सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि हुक्का पीने का एक सेशन एक घंटे या उससे ज़्यादा समय तक चल सकता है। हुक्के के धुएँ में हानिकारक रसायनों की मात्रा बहुत ज़्यादा होती है। इनमें टार, कार्बन मोनोऑक्साइड, भारी धातुएँ और कैंसर पैदा करने वाले रसायन, जिन्हें कार्सिनोजेन्स कहा जाता है, शामिल हैं। दरअसल, हुक्का पीने वाले सिगरेट पीने वालों की तुलना में ज़्यादा कार्बन मोनोऑक्साइड और धुएँ के संपर्क में आते हैं।
हुक्के के धुएं से गंभीर बिमारियां घेर सकती है।
फेफड़े, मूत्राशय, पेट, ग्रासनली और मौखिक कैंसर हो सकता है। दिल की बीमारी के साथ अन्य गंभीर स्थितियाँ, जैसे फेफड़ों की बीमारियाँ और कार्बन मोनोऑक्साइड की विषाक्तता हो सकती है। हुक्का पीने से भी सिगरेट पीने की तरह ही निकोटीन की उच्च मात्रा निकलती है। निकोटीन तंबाकू में मौजूद एक आदत बनाने वाला रसायन है जो व्यक्ति को धूम्रपान करने के लिए प्रेरित करता है। जिसका मतलब है कि आप धीरे धीरे इसके आदी बहुत आदी होते चले जाते है।
























