गौरव कुशवाहा : उत्तरप्रदेश के सभी प्यारे अभिभावकों हम आपको यूपी के सभी निजी विद्यालयों के द्वारा वसूले जा रहे मनमाने दामों के खिलाफ लड़ाई लड़ने के कुछ नियम बताने जा रहे अगर आप इन्हें मान लेंगे तो हमें पूरा विश्वास है कि हम आप मिलकर इन विद्यालयों की अक्ल ठिकाने लगा सकते है।
सबसे पहले समझ लीजिए शिक्षा मंत्री श्री मति गुलाब देवी का सख्त निर्देश है कि अगर कोई भी विद्यालय या पब्लिकेशन आपको NCRT पैटर्न के अलावा किसी निजी प्रकाशक की कापी किताबे बेचता है या लेने पर विवश करता है तो उसपर मुकदमा लिखकर उसे जेल भेजा जाएगा। साथ ही ड्रेस स्टेशनरी आदि के लिए भी विद्यालय किसी अभिभावक को फोर्स नही करेगा। ऐसा करने पर विद्यालय की मान्यता तक रद्द हो सकती है।
देखते है कार्यवाही होती है की नही.?
शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा है की पुस्तक माफिया जेल जाएंगे, ‘मनमानी करने वाले निजी स्कूल पर कार्रवाई होगी’। #Sambhal #GulabDevi #EducationNews@gulabdeviup pic.twitter.com/WV7Eu5fqq8
— Gaurav kushwaha Journalist (@upwalegaurav) April 3, 2026
नियम के मुताबिक विद्यालयों को वो क्या फीस लेते है,उनके यहां कितने शिक्षक है, मान्यता का सर्टिफिकेट, जैसी तमाम जानकारिया अभिभावकों के लिए वेबसाइट के माध्यम से सार्वजनिक करनी होती है।
निजी विद्यालय के संचालक के लिए पर्याप्त भूमि होना बेहद जरूरी है।
समझ लीजिए शहरी क्षेत्र में लगभग 3000 वर्ग मीटर और ग्रामीण क्षेत्र में लगभग 6000 वर्ग मीटर भूमि निर्धारित की गई है। इसके साथ ही स्कूल का भवन पक्का, सुरक्षित और पर्याप्त कक्षाओं वाला होना चाहिए, जहां हर कक्षा में उचित रोशनी और वेंटिलेशन होना चाहिए।
विद्यालय में सभी जरूरी सुविधाएं जैसे साफ पेयजल, लड़के-लड़कियों के अलग शौचालय, स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था होना अनिवार्य है। इसके अलावा प्रत्येक कक्षा में CCTV कैमरा, बायोमेट्रिक उपस्थिति सिस्टम, इंटरनेट सुविधा और स्कूल की अपनी वेबसाइट भी जरूरी मानी गई है।
सरल भाषा में समझिए तो छोटे निजी विद्यालय जो मान्यता प्राप्त है लेकिन मान्यता के नियमों को नही मानते जैसे उनके पास पार्क नही है, लाइब्रेरी नही है, कंप्यूटर कक्ष नही है, इमारत का नक्शा संबंधित विभाग से पास नही है, वेबसाइट नही है और है तो उसपर पारदर्शी जानकारी नही है, उपयुक्त शिक्षक नही है, समेत दर्जनों ऐसे नियम है जो ये विद्यालय नही मानते जिनकी शिकायत की जा सकती है जिसे बात इनकी मान्यता रद्द करने तक पर आ जाएगी।
लड़ाई लड़ने का पहला नियम फीस समेत जमा किए जाने वाले हर शुल्क की रशीद लीजिए, नही देने पर वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड करिए, उसके बाद कही जाने की जरूरत नही आन लाइन सीपी ग्राम पोर्टल या जनसुनवाई ऐप पर इसकी शिकायत करिए। और अगर आप थोड़ा आगे का सोचते है तो फिर सीधे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी या फिर सीधे जिलाधिकारी को मिलकर आप शिकायत दे सकते है।
यकीन मानिए शिकायत करने के 30 दिनों के भीतर आपसे बेसिक शिक्षा अधिकारी या जांच हेतु संबद्ध किए गए अधिकारी द्वारा संपर्क किया जाएगा जिसके बाद आप ऑडियो वीडियो उन्हें उपलब्ध कराएंगे और उसके बाद कार्यवाही तय है।याद रखिए पूरे यूपी मे शुल्क निवारण नियामक समिति अभिभावकों की शिकायतों के लिए ही काम करती है।
अगर इस तरह से यूपी के 20% अभिभावक भी अपने बच्चों के लिए शिकायते करने लगे तो जाहिर है निजी विद्यालयों पर बड़ा शिकंजा कसा जा सकता है, हर शिकायत के लिए आपको सड़क पर उतरने की जरूरत नही है कुछ काम फोन से भी किए जा सकते है।
जागरूक बनिए आवाज उठाइए,सड़को पर नही तो फोन से ही शिकायत दर्ज करवाईए। इस मामले पर एक कड़वा सच ये है कि लोग परेशान होने के बावजूद शिकायत करने से कतराते है यही वजह है कि निजी विद्यालय लगातार आपका शोषण करते है और आप उनका कुछ नही कर पाते।
निजी विद्यालयों के लिए मान्यता के मानकों को जानने हेतु आप ये पीडीएफ डाउनलोड कर सकते है, धन्यवाद।



















